• Arjun Mehar

RU के पूर्व महासचिव और युवा नेता नरेश मीणा ने बढ़ते निजीकरण के विरोध में युवाओं के नाम लिखा खुला खत

देश में इस वक्त बढ़ते निजीकरण और बेरोजगारी के खिलाफ युवा सोशल मीडिया पर एकजुट हो रहे है और लगातार सरकार के खिलाफ ट्रेंड्स चला रहे है. ऐसे में राजस्थान यूनिवर्सिटी के पूर्व महासचिव और युवा नेता नरेश मीणा ने बढ़ते निजीकरण के विरोध में देश के युवाओं के नाम एक खुला खत अपनी Facebook प्रोफाइल पर पोस्ट किया है. उन्होंने युवाओं को सम्बोधित करते हुए यह खत लिखा है.




प्रिय साथियों,

मैं कई दिनों से व्यक्तिगत परेशानियों की वजह से सक्रिय राजनीति से दूर हूँ..! लेकिन वर्तमान में बढ़ते निजीकरण की वजह से युवाओं का भविष्य और ST-SC-OBC का आरक्षण दाँव पर लगा हुआ है..! ऐसी परिस्थितियों में भी यदि मैं, आप और इस देश की आम जनता चुप रही तो आगामी पीढ़ी हमसे सवाल करेगी कि जब देश को बर्बाद किया जा रहा था तो हम सब चुप क्यों थे..?


मेरे प्यारे साथियों, आप सभी जानते है कि भाजपा और आरएसएस के शीर्ष नेता समय-समय पर आरक्षण के ख़िलाफ़ बयान देते रहते है..! मैं आपका ध्यान दो बयानों कि तरफ़ आकर्षित करना चाहता हूँ..! पहला बयान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था- “आरक्षण जातिगत नहीं होना चाहिए, बल्कि आर्थिक आधार पर होना चाहिए और साथ में आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए..!” और दूसरा बयान भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था- “आरक्षण को BJP सरकार उस स्तर पर पहुंचा देगी जहां उसका होना ना होना बराबर होगा..!"


हम और आप देख रहे है कि वर्तमान में मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट मिलकर आरक्षण को ख़त्म करने की लगातार कोशिश कर रहे है..! एक तरफ़ सरकार लगातार निजीकरण को बढ़ावा देकर आरक्षण को कमजोर कर रही है तो दूसरी तरफ़ सुप्रीम कोर्ट आरक्षण को लेकर संविधान विरोधी टिप्पणी दे रहा है और फ़ैसले सुना रहा है..!


अतः चाहे सरकार हो या न्यायालय, अगर संविधान के विरोध में जाकर आरक्षित वर्ग के अधिकारों और संविधान के विरोध में कोई कार्यवाही करते हैं या फैसला करते हैं, तो हमें उन फैसलों का भरपूर तरीक़े से और पूरी ताकत के साथ विरोध करना चाहिए..! वरना एक दिन सरकार और न्यायालय दोनों मिलकर आरक्षित वर्ग को अपंग और असहाय बना देंगे..!



ऐसे में मैं उन तमाम व्यक्तियों व संगठनों जिनकी संविधान व लोकतंत्र के बुनियादी मूल्यों में विश्वास है और जिनका मानना है कि देश की समस्याओं का समाधान और प्रगति का रास्ता संविधान व लोकतंत्र के दायरे में रह कर ही सम्भव है..! देश के तमाम ऐसे व्यक्तियों व संगठनों जिनका विश्वास गांधीवादी, अम्बेडकरवादी, समाजवादी, वामपंथी और प्रगतिशील विचारधाराओं में है..! उनसे निवेदन है कि हमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होकर बढ़ते निजीकरण का विरोध करना चाहिए और देशभर में एक संगठित आंदोलन खड़ा करना चाहिए या फिर कोई भी नेता इस बढ़ते निजीकरण के ख़िलाफ़ ज़मीनी आंदोलन करें, हमें उसका समर्थन करना चाहिए..!


नरेश मीणा

(पूर्व महासचिव, राजस्थान यूनिवर्सिटी )


पोस्ट का स्त्रोत:- https://www.facebook.com/100004884002384/posts/1565865076919611



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