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स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागु करे हैशटैग ट्विटर पे क्यों ट्रेंड कर रहा है ?

जब भी हम किसानो की बात करते है तो सबसे पहले स्वामीनाथन रिपोर्ट की बारे में बात होती है । 2006 से आज तक बार बार ये आवाज़ उठती रही है हर किसान संघटन और एग्रीबिजनेस को समझने वाला स्वामीनाथन रिपोर्ट लागु करने की बात करता है एम एस स्वामीनाथन



स्वामीनाथन को भारत में गेहूं की उच्च उपज देने वाली किस्मों को पेश करने और आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका के लिए भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।

स्वामीनाथन लगभग 10 साल तक राष्ट्रीय किसान आयोग के अध्यक्ष रहे है और इसी दौरान यूपीए सरकार ने किसानों की स्थिति का जायजा लेने के लिए स्वामीनाथन की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया जिसे स्वामीनाथन आयोग कहा गया. उन्होंने किसान से सबंधित प्रोब्लेम्स पे रिसर्च करके एक रिपोर्ट तैयार की जिसे स्वामीनाथन रिपोर्ट कहा जाता है। इनकी रिपोर्ट अकाल संकट के कारणों और किसान आत्महत्याओं में वृद्धि पर केंद्रित थी, और किसानों के लिए एक समग्र राष्ट्रीय नीति के माध्यम से उन्हें संबोधित करने की सिफारिश की।

स्वामीनाथन रिपोर्ट इस रिपोर्ट में किसान और देश के तेज और अधिक समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के सुझाव हैं।

किसान संकट के कारण कृषि संकट ने हाल के वर्षों में किसानों को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया है। कृषि संकट के प्रमुख कारण हैं: भूमि सुधार में अधूरा एजेंडा, पानी की मात्रा और गुणवत्ता, थकी हुई पुरानी टेक्नोलॉजी, संस्थागत ऋण की समयबद्धता, और सुनिश्चित और पारिश्रमिक विपणन के अवसर।प्रतिकूल मौसम संबंधी कारक भी किसान की समस्या बढ़ाते रहते है। किसानों को बुनियादी संसाधनों पर पहुंच और नियंत्रण का आश्वासन दिया जाना चाहिए, जिसमें भूमि, जल, जैव संसाधन, ऋण और बीमा, प्रौद्योगिकी और ज्ञान प्रबंधन, और बाजार शामिल हैं। NCF की सिफारिश है कि "कृषि" को संविधान की समवर्ती सूची में डाला जाए। भूमि सुधार की अनुशंसा

अतिरिक्त और बेकार जमीन को भूमिहीनों में बनता जाए और आदिवासी क्षेत्रों में पशु चराने का हक दिया जाये सिंचाई सिंचाई क्षेत्र में निवेश में भारी वृद्धि की जाए और भूजल पुनर्भरण के लिए लघु सिंचाई और नई योजनाएँ चलायी जाएँ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा रखने की सिफारिश भी की गई है ताकि छोटे किसान भी मुकाबले में आएं, यही इसका मकसद है. किसानों की फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य कुछेक नकदी फसलों तक सीमित न रहें, इस लक्ष्य से ग्रामीण ज्ञान केंद्र और बाजार का दखल स्कीम भी लांच करने की सिफारिश की गई है.

सिफारिशों की मुख्य बातें...

एमएसपी: फसल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम किसानों को मिले.

किसानों की "नेट टेक होम इनकम" की तुलना सिविल सेवकों से की जानी चाहिए।

स्थानीय उपज के लिए घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के ग्रेडिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विकास को बढ़ावा दिया जाने और एक एकल भारतीय बाजार की ओर बढ़ने की जरूरत है ।

किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज कम दामों में मुहैया कराए जाएं.

गांवों में किसानों की मदद के लिए ग्राम ज्ञान केंद्र (वीकेसी) या ज्ञान चौपाल बनाया जाए जो मार्गदर्शन के केंद्र के रूप में कार्य करे

संयुक्त पटटे के साथ महिला किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी करें।

किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को मदद मिल सके.


किसानो की हालत बदल क्यों नहीं रही है ?

दरअसल, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को आज तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है. अगर इस रिपोर्ट को लागू कर दिया जाए तो किसानों की तकदीर बदल जाएगी क्यूंकि MSP के माध्यम से अगर लागत का डेढ़गुना कीमत मिलता है और इनके टेक होम इनकम को सिविल सर्विसेज के टेक होम सैलरी के तुलनात्मक बनाया जाए तो किसान इस देश की जीडीपी और इकोनॉमी को आगे ले जाने में अच्छी भूमिका निभा सकता है ट्विटर कम्पैन किसान समर्थन और किसान संघटन आज को लागु करने के लिए ट्विटर पे आवाज़ उठा रहे है। #ImplementSwaminathanReport हैशटैग नेशनल ट्रेंड बन चूका है

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