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उत्तर और दक्षिण भारतीय शिक्षा और लोगो की धारणा

शिक्षा अमूल्य और हर कोई अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा देना चाहता है लेकिन अच्छी शिक्षा के लिए खर्च भी करना पड़ता है। उत्तर भारत और दक्षिण भारत की शिक्षा के खर्च की तुलना करे तो बाकि राज्यों की तुलना में दक्षिण भारतीय राज्यों में ग्रामीण और शहरी दोनों जगह पे शिक्षा पे ज्यादा खर्चा किया जाता है दक्षिण भारत में लोग अपने बच्चों को तकनीकी शिक्षा का सपना दिखाते हैं, बड़े पैमाने पर सरकारी और निजी कॉलेज में प्रवेश दिलाते है। औसतन, भारत में उच्च शिक्षा में ग्रामीण क्षेत्र में कुल घरेलू खर्च का 15.3% और शहरी क्षेत्रों में 18.4% है जबकि दक्षिण भारत में ये आंकड़ा 43% और 38% हैं।


VIT, दक्षिण भारत का एक निजी कॉलेज


शैक्षिक विकास सूचकांक

राज्यों के शैक्षिक विकास सूचकांक को एनालिसिस करे तो दक्षिण भारतीय राज्य उत्तरी राज्यों से काफी आगे है। उत्तर भारत की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से कम है, जबकि दक्षिणी राज्यों में लगभग 80% आबादी पढ़ने और लिखने में सक्षम है जो दक्षिण भारत की साक्षरता दर को राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

लोगो की धारणा और शिक्षा संस्थानों को देखने का रवैया


उत्तरभारत में इलीट क्लब और नॉन इलीट क्लीब में बहुत ज्यादा अंतर है जो सबसे ज्यादा उत्तर भारत के बीमारू राज्यों में देखा जा सकता है। उत्तर भारत में किसी अच्छे कॉलेज से पढाई करना और एक अच्छी सरकारी नौकरी हासिल करना ही एक अच्छा सोशल स्टेटस बनता है जो की बहुत कम लोगो को हासिल हो पाता है। एक अच्छे से कॉलेज में एडमिशन के लिए लोग 2-5 साल तक का ड्राप ले लेते है जबकि इन्ही सालो में दक्षिन भारत का एक औषत विद्यार्धी एक औषत कॉलेज से शिक्षा लेके स्किल सुधार में लगा होता है और अच्छी स्किल के आधार पे भारत की सभी अच्छी कंपनियों के साथ साथ विदेशो में भी अच्छी जॉब हासिल कर लेता है


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