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भारतीय समाज और पीढ़ी अंतराल

पीढ़ी अंतराल

युवा और बूढ़े लोगो के बीच संचार की एक निराशाजनक कमी के साथ साथ दोनों पीढ़ी का संस्कृति को समझने और चरित्र को अपनाने की अलग अलग समझ और दृष्टिकोण ही पीढ़ी अंतराल कहा जाता है.


पीढीयो का वर्गीकरण

पीढ़ी एक्स:

ऐसे लोग जिनकी उम्र 41 से अधिक है जो परिवार में मुखिया के रूप में स्थापित है और घर परिवार में सभी प्रकार के निणर्य लेना चाहते है। पीढ़ी एक्स ने बहुत ही बुनियादी मॉडल पर काम है जहाँ उन्हें भौतिकवादी सफलता में खुशी मिली और इस पीढ़ी ने एक संपूर्ण जीवनकाल सिर्फ रोटी, कपडा और मकानों की जमाखोरी में समर्पित कर दिया | ये समझते है की इनके लड़के लड़की इनके हिसाब से सोचे और वही करे जो इन्हे सही लगता है। ये पीढ़ी पारिवारिक मूल्यों और प्रेम से ज्यादा सामाजिक प्रतिष्ठा और एक छलावे वाली हैशियत के बारे में ज्यादा सोचके अपने परिवार की भावनाओ को दबाने में लगे रहते है । पीढ़ी वाई (मिलेनियल्स):

26 साल से 40 साल के लोगो को इस केटेगरी में शामिल किया जाता है । पीढ़ी वाई नए सपने देखने लगी है और स्थापित सामाजिक नियमो को तोड़के नए नए फील्ड में अलग मुकाम हासिल करना चाहती है। इस पीढ़ी को इन नए सपनो का पीछा करने में खुसी मिलती है और इन सपनो में सिर्फ पैसा ही नहीं बल्कि एक प्यार वाली जिदंगी और खुद का पार्टनर खुद चुनने का सपना भी है | ये सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ साथ बदलते वक़्त को भी समझने की कोशिश में लगे हुए है। एक रूप इन्हे खुद के निणर्य लेने के लिए प्रेरित करता है तो दूसरा इन्हे पीढ़ी एक्स से भावनात्मक रूप से जोड़े हुए है। ये खुद के निर्णय लेना तो चाहते है लेकिन पीढ़ी एक्स इन्हे इनके निर्णय लेने से रोकती रहती है। इस पीढ़ी में लड़का लड़की साथ काम करना चाहते है साथ डिसीजन लेना चाहते है और पीढ़ी एक्स से अलग रहके अपनी खुद की जिंदगी जीने की लालसा भी रखते है।


पीढ़ी जेड (आइजनरेशन):

5 साल से 25 साल के लोग आईजनरेशन (पीढ़ी जेड) कही जाती है। ये पीढ़ी सबसे विकसित पीढ़ी के रूप में उभर रही है जहाँ ये एक छोटी उम्र से टेक्नोलॉजी यूजर के रूम पे आ रहे है। फाइनेंस और पैसे की प्रॉब्लम से दूर, मातापिता के सपोर्ट से काफी हाई टेक और स्वंत्र लाइफ जी रहे है। इन्हे पीढ़ी वाई का सपोर्ट है और इसी बजह से पीढ़ी एक्स की छलावे वाली सामाजिक प्रतिष्ठा के संघर्ष से दूर है ।


पीढ़ी अंतराल



भारतीय समाज की पीढ़ी एक्स अपने बच्चो को खुद के निर्णय लेने से रोकती है और अपने निणर्य बच्चो पे थोपती है और पीढ़ी वाई खुद के चिन्तन से लिए गए निर्णय के साथ आगे बढ़ने में असमर्थ महसूस कर रही है। जहाँ पीढ़ी वाई अपना निर्णय ले पा रही है वहां पर पीढ़ी एक्स अपने आप को लाचार और वेवश समझने लगी है।

भारतीय समाज ने खुद को ऐसे माहौल में लाके खड़ा कर दिया है जहा एक पीढ़ी का निर्णय दूसरे पीढ़ी को लाचार सिद्ध कर रहा है।

भारतीय समाज में इन पीढ़ियों के बीच आपसी समझ और मिलके निर्णय लेने की क्षमता की कमी साफ दिख रही है बल्कि एक दूसरे के लिए अवसाद बनके एक दूसरे की शांति छीन रहे है। जब तक पीढ़ी एक्स अगली पीढ़ी को अपने निर्णय लेने की अनुमति नहीं देगी ये संघर्ष चलता रहेगा ।  

पीढ़ी एक्स से लेके पीढ़ी वाई तक सोचने के तरीको और विचार में बदलाव के कारण भारतीय समाज में माता-पिता और बच्चों के बीच भारी तनाव पैदा हो गया है। ये पैसा और सपने की लड़ाई है जिसमे पीढ़ी वाई जिसे युवापीढ़ी भी कहा जा रहा है वो सपने की लड़ाई लड़ रही है और पीढ़ी एक्स से उसे कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। भारतीय समाज एक दूसरे को दबाने को ही सामाजिक मूल्य समझने लगा है। सपने देखना और प्रेम करना भारतीय संस्कृति और परम्परा के खिलाफ माना जा रहा है जिसे पीढ़ी वाई तोड़ देना चाहती है लेकिन रिश्तो की वैल्यू के चलते पीढ़ी वाई आत्महत्या जैसे बड़े कदम उठा रही है या टूटे हुए सपनो के साथ अवसाद भरी जिंदगी जीने लगी है |


पीढ़ी एक्स को निर्णय लेने की जिम्मेदारी को अगली पीढ़ी को सौंपना होगा और इसे वो अपने पावर में कैटोती के रूप में नहीं बल्कि सामनजस्य के रूप ले लेंगे तो ही भारतीय समाज आगे जा सकता है। पीढ़ी एक्स ने भारतीय समाज को एक जगह पे बाँध दिया और एक बंधा हुआ समाज कभी प्रगति नहीं कर पाता है।



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