• Arjun Mehar

#BlackLivesMatter से भारत में भी "नस्लवाद, जातिवाद और ब्राह्मणवाद" को लेकर बहस शुरू हो गयी है।

Updated: Jun 23, 2020

अमरीका में जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत के बाद काले-गोरे पर सियासत गर्म हो चुकी है। अमरीका के मिनेपॉलिस शहर से लेकर White House तक लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे है।



अमेरिका में आंदोलन इतना हिंसक हो चुका है कि बीते दिनों वॉशिंगटन समेत अमेरिका के 40 शहरों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है और प्रदर्शन कर रहे लोग जब White House पहुँचे तो व्हाइट हाउस के सुरक्षा अधिकारियों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अंडरग्राउंड बंकर में ले जाना पड़ा।


यह आंदोलन तब शुरू हुआ जब एक विडियो क्लिप वाइरल हुई। इस क्लिप में जॉर्ज फ़्लॉयड नाम के एक अश्वेत (काला) व्यक्ति की गर्दन को अपने घुटने से एक श्वेत (गोरा) पुलिस अधिकारी दबाता हुआ दिख रहा था। वीडियो में देखा जा सकता है कि आसपास खड़े कुछ लोग श्वेत पुलिस अधिकारी से जार्ज फ़्लॉयड को छोड़ने की मिन्नतें कर रहे हैं। और साथ में श्वेत पुलिस अधिकारी के घुटने के नीचे दबे अश्वेत जॉर्ज बार-बार कह रहे हैं कि "Please, I Can't Breathe (मैं सांस नहीं ले पा रहा हूँ)" और जार्ज के यही शब्द (Please, I Can't Breathe) उनके आख़िरी शब्द बन गए। इसके कुछ ही मिनटों बाद 46 साल के जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत हो गई।



जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद नस्लवाद के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर एक बार फिर से “#BlackLivesMatter (अर्थात् कालों की ज़िंदगी भी मायने रखती है) कैम्पेन शुरू हो गया है। दुनिया भर से इस हैशटैग पर रोज़ लाखों-करोड़ों की संख्या में ट्वीट हो रहे है। साथ में Twitter ने भी “ब्लैक लाइव्स मैटर” के सम्मान में अपना प्रोफाइल फ़ोटो बदल दिया और Bio में “#BlackLivesMatter” लिख दिया है।


(Note:- 2014 में 18 वर्षीय माइकल ब्राउन की हत्या के बाद 'ब्लैक लाइव मैटर्स' अस्तित्व में आया था और इस प्रोटेस्ट मूवमेन्ट काउद्देश्य था - "व्हाइट सुप्रिमेसी को ख़त्म करना और काले लोगों के समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा के मामलों में हस्तक्षेप करने के लिएस्थानीय स्तर पर एकजुट होना।”)


लेकिन एक बार फिर से अमेरिका से शुरू हुआ यह आंदोलन पूरी दुनिया में फैलता हुआ अब इंडिया में पहुँच गया है और यहाँ भी“नस्लवाद, ब्राह्मणवाद और जातिवाद” को लेकर बहस शुरू हो गयी है। बाबा साहेब अंबेडकर ने भी नस्लभेद को भारत में होने वाले जातीय भेद से जोड़ा था।

भारत में भी वर्षों से दलितों, आदिवासियों, मज़दूरों, महिलाओं और मुस्लिमों पर लगातार अत्याचार जारी है; लेकिन कभी इन तबकों के समर्थन में इंडिया की बहुसंख्यक आबादी सड़कों पर नहीं निकली क्योंकि इंडिया में लोगों के लिए #MuslimLivesMatter, #DalitLivesMatter, #WomenLivesMatter, #TribalLivesMatter, #LabourerLivesMatter आदि अलग-अलग मायने रखते है। कोई केवल दलितों पर बोलेगा तो कोई सिर्फ़ आदिवासियों पर तो कोई केवल मुस्लिमों पर; जबकि होना यह चाहिए कि हर शोषित जाति, व्यक्ति, समुदाय और वर्ग के पक्ष में बिना भेदभाव के #AllLivesMatter पर आवाज़ बुलंद होनी चाहिए।


अमेरिका में George Floyd के साथ जो हुआ वो भारत में ख़ासकर दलित-आदिवासियों के साथ रोज होता है। लेकिन इस देश केदलित-आदिवासी तो उसी हिंदुत्व को बचाने में लगे हुए है, जो उनके शोषण के लिए ज़िम्मेदार है। इस Lockdown में दलितों, आदिवासियों (ख़ास कर गुजरात के केवड़िया के आदिवासियों पर), पिछड़ों और मज़दूरों पर खूब शोषण हुआ लेकिन किसी ने भी एक विधायक, सांसद और मंत्री के घर का घेराव करना तक उचित नहीं समझा। जबकि अमेरिका में एक अश्वेत की मौत पर पूरा अमेरिका सड़कों पर उतर आया और यही लोकतंत्र की खूबी है। जबकि भारत में लोगों ने लोकतंत्र को महज प्रस्तावना का हिस्सा समझ लिया है; ऐसे लोगों को लोहिया जी की यह बात “अगर सड़कें खामोश हो जाएँ तो संसद आवारा हो जाएगी” हमेशा याद रखनी चाहिए।

इस वक़्त भारत के कई सेलेब्रिटीज़ #BlackLivesMatter पर लगातार लिख रहे है लेकिन आपने इन लोगों को कभी भी भारत केशोषित तबकों की आवाज़ बुलंद करते हुए नहीं देखा होगा। साथ में इन लोगों का दोगलापन देखिए ये लोग Twitter पर “All Colours Are Beautiful” भी लिख रहे है और इनको फ़ेयर एंड लवली, Ponds Cream जैसे सौंदर्य प्रसाधनों का Ad भी करना है। वास्तविकता यह है कि भारत में जातिवाद, ब्राह्मणवाद और White Supermacy का चरित्र एक ही है; और अमेरिका की घटनाओं पर यहाँ बाजाबजाना फ़ैशन है। अंत में लोगों को यह बात भी समझनी होगी कि हिटलर, मुसोलिनी, ट्रम्प और मोदी जैसे दक्षिणपंथी विचारधारा और अतिराष्ट्रवादी लोगों ने सिर्फ़ बाँटने और शोषण का काम किया है; कभी नस्ल के नाम पर, कभी धर्म के नाम पर तो कभी जाति के नाम पर।


Arjun Mehar


(अर्जुन महर दिल्ली विश्वविद्यालय में लॉ के स्टूडेंट है और वामपंथी छात्र संगठन AISA से जुड़े हुए है. साथ में दो किताबें भी लिख चुके है)

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