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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आज की दुनिया

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मशीनों में मानव बुद्धि की तरह सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता को संदर्भित करता है । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से एक कंप्यूटर इंसानो की तरह सोचने समझने की क्षमता आ गयी है ।

आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस का इतिहास


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का आरंभ 1950 के दशक में ही हो गया था. एलन ट्यूरिंग पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंने इस फील्ड में सबसे पहले सोचना चालू किया। उन्होंने पचास के दशक में ट्यूरिंग मशीन बनाई जिसमे एक मशीन किसी भी मशीन का अनुकरण कर सकती है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पहला स्वर्ण काल 1954-1974 को कहा जाता है।

इस समय पर आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस पर काफी रिसर्च किये गए। इस दौरान कंप्यूटर बीजगणित की समस्याओं को हल करना, ज्यामिति में प्रमेयों को साबित करना, अंग्रेजी बोलना सीखना जैसे कार्य कंप्यूटर पे होने लगा । यही समय था जब शोधकर्ताओं ने साबित किया की एक बुद्धिमान मशीन का निर्माण किया जा सकता है


आगे बीस साल 1974-1993 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का काफी ठंडा वातावरण रहा जहाँ इस विषय पे फंडिंग की कमी देखी गयी और कम्पनियो ने भी को लगभग नकार दिया था इसके बाद थोड़ा थोड़ा रिसर्च चालू हुआ।


अभी के समय को आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस का सबसे नवीनतम स्वर्ण काल कहा जा रहा है जो 2011 से चालू हुआ है। जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य जो आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस के दायरे में आ रहे है वो है इंसानी वाणी को समझना, शतरंज या "गो के खेल में माहिर इंसानों से भी जीतना, बिना इंसानी सहारे के गाडी खुद चलाना।


आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस का वर्गीकरण

जब हम एआई की बात करते है तो उस समय आर्टिफिशियल नैरो इंटेलिजेंस (एएनआई) की ही बात कर रहे होते है क्यूंकि अभी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) के लेवल पे हम नहीं पहुंचे है । अधिकांश विशेषज्ञ इस बात से सहमत है कि एएनआई अभी भी परिपक्व हो रहा है और कम्पनीज और वैज्ञानिक इसके उपयोग धीरे धीरे करने लगे है । एजीआई अभी भी कम से कम कुछ दशक दूर है लेकिन इसकी कल्पना आप द मैट्रिक्स या टर्मिनेटर जैसी फिल्मों में देख चुके है

भारत में आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस कैसे विकसित हो रहा है भारत के राष्ट्रीय थिंक-टैंक निति आयोग ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की परिवर्तनकारी क्षमता पर एक चर्चा पत्र जारी किया जिसमें कहा गया है कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से अपनी अर्थव्यवस्था में $1 ट्रिलियन जोड़ सकता है। एआई आधारित स्टार्टअप्स की संख्या के लिहाज से भारत जी-20 देशों में तीसरे नंबर पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इकॉनमी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से समाज के अधिकतम फायदे के लिए ‘5-I’ (विशिष्टता, स्वदेशीकरण, नवप्रवर्तन, अवसंरचना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) का विज़न G20 सम्मलेन के माध्यम से लोगो के सामने रखा

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया ने भारत में 5 लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग देने की योजना बनाई है. अगले 3 साल में यह ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके लिए कंपनी 10 विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब बनाएगी. आईआईटी मद्रास (IIT Madras) की रिसर्च टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एक टेक्नोलॉजी विकसित की है, जो बोलने में असमर्थ लोगों के मस्तिष्क संकेतों (ब्रेन सिगनल) को भाषा में बदल सकती है. आईआईटी हैदराबाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में बी-टेक कार्यक्रम शुरू करेगा। यह एआई में बी-टेक प्रोग्राम की पेशकश करने वाला पहला भारतीय शैक्षणिक संस्थान है।

विश्वपटल पे बड़े लीडर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कैसे देखते है

गूगल के सीइओ सुन्दर पिचाई ने कहा है की मानवता के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आग या बिजली से भी अधिक महत्वपूर्ण कही जा सकती है|

एलान मस्क ने कहा है की दुनिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जितना असर होगा, उतना शायद ही किसी और आविष्कार का होगा

स्टीफन हॉकिंग ने इस्पे राय रखते हुए कहा है पूर्ण रूप से विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव जाति के अंत की कहानी तक लिख सकता है ।

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