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कोरोना के इस संकट की घडी में सबसे मुश्किल हालत में है प्रवासी मजदूर


असमान विकास, गरीबी, रोजगार के अवसरों की कमी, बड़े परिवार-आकार और प्राकृतिक आपदाओं जैसे कारन है एक मजदूर के माइग्रेशन का ।


मजदूर ऐसे शिविरों में फंसे हुए हैं जो सुखद नहीं है। इस घडी में कोई काम और आय नहीं है और नहीं ही निकट भविस्य में इसकी आशा है जिससे निराशाजनक माहौल बना हुआ है और सभी लोग घर वापस जाना चाहते है




क्या कर रही है सरकार दुसरो राज्यों से मजदूर और छात्रों को गृह राज्य लाने में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री योगी सबसे तेज और एक्टिव दिखे। चाहे दिल्ली बस भेजने का मामला हो या कोटा से सभी छात्रों को बस के माध्यम से घर पहुंचाने का कार्य। दुसरो राज्यों से प्रवासी मजदूरों के लिए प्रशासन को एक्टिव किया ताकि प्लानिंग के तहत सभी प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाया जा सके । राजस्थान से वापस आए प्रदेश के छात्र-छात्राओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया और सिचुएशन का जायजा लिया । राजस्थान के मुख्यमत्री गेहलोत ने अपने निवास से प्रवासी राजस्थानियों के साथ बातचीत की और उनकी प्रॉब्लम समझी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने अपनी अधिकारिओ को आदेश दिए है की मजदूरों के प्रदेश में आगमन पर किया जाये स्वागत किया जाए और उन्होंने मजदूरों को सन्देश दिया है की सभी मजदूरो को प्रदेश वापस लाया जायेगा, वे बिल्कुल चिंता न करें। लॉक डाउन के दौरान पीड़ित प्रवासी श्रमिको की अंतर-राज्यीय आवाजाही के लिए दी गई छूट दी गयी है लेकिन सरकार की तरफ से किये जा रहे प्रयास ऊंट के मुँह में जीरा है

जो मजदूर घर वापस आ चुके है वो बेरोजगार है और कोई भी ये अनुमान नहीं लगा पा रहा है की ये कोरोना कब तक चलेगा। जो मजदूर मजदूर करके अपने परिवार को खिलाने के लिए हर महीने पैसे घर भेजता था अब घर पे खिलाने के वो खुद जुड़ गए है और इनकम नहीं है, हालत ख़राब होते जा रहे है

प्रवासी मजदूर क्राइसिस के इस टाइम में क्या सेना का साथ लिया जाना चाहिए ? लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में भी भारतीय सेना ने चिकित्सा उपकरण और जनशक्ति का योगदान दिया था। जब भी राष्ट्र की आवश्यकता होती है, नागरिको की सहायता के सेना को बुलाया जाता रहा है। सेना देश भर में हर जगह तैनात है, उनके पास टेंट, राशन और पानी की आपूर्ति करने की कैपिबिलिटी है ।लोगों को उनके गंतव्य स्थान और भोजन को स्थानांतरित करने के लिए परिवहन वाहन हैं। प्रवासी मजदूर को उनके गृह राज्य भेजने या राशन पहुंचाने के लिए सेना की सहायता लेके मजदूर की समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है

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